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मौद्रिक प्रवाह

मौद्रिक प्रवाह
महंगाई से निपटना हो प्राथमिकता
आरबीआई ने रेपो रेट में मई से लेकर अब तक 1.40 फीसदी की वृद्धि की है। उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा कि अमेरिका समेत कई अन्य केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों में आक्रामक रूप से वृद्धि के बीच आरबीआई नीतिगत ब्याज दरों में कम से कम 0.35 से 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। एसोचैम महासचिव दीपक कपूर ने कहा, ‘‘उद्योग कम ब्याज दरों को देखना चाहता है, लेकिन टिकाऊ आर्थिक वृद्धि के लिए मुख्य चुनौती और प्राथमिकता महंगाई से निपटने की है।’’
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उच्च स्तर पर पहुंच जाएंगी होम लोन की दरें
कोलियर्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (भारत) रमेश नायर ने कहा कि रेपो दर में और वृद्धि की संभावना है। सरकार मुद्रास्फीति के स्तर पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रही है। एबीए कॉर्प के निदेशक अमित मोदी ने कहा, “रेपो दर में बढ़ोतरी करने से होम लोन की दरें अपने उच्चस्तर पर पहुंच सकती हैं। इसका असर लग्जरी श्रेणी के घर खरीदारों की भावनाओं पर पड़ सकता है। मगर विशेष कर किफायती और मध्यम आवास श्रेणी में कुछ आधार अंकों की बढ़ोतरी का ज्यादा असर नहीं होगा और नई बुकिंग एवं बिक्री जारी रहेगी।" मिगसन ग्रुप के प्रबंध निदेशक यश मौद्रिक प्रवाह मिगलानी ने कहा, “आरबीआई मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए कुछ आधार अंकों की वृद्धि कर सकता है। इस समय आरबीआई अप्रत्यक्ष रूप से सभी क्षेत्रों को फायदा पहुंचाने के लिए रेपो दर में कुछ बदलाव मौद्रिक प्रवाह करेगा. ।’’

दरें बढऩे और रुपया गिरने से ईसीबी प्रवाह में आएगी नरमी

ईसीबी सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों समेत विभिन्न कंपनियों के लिए वित्त की मुख्य स्रोत के तौर पर उभरी है। आरबीआई के आंकड़े से पता चलता मौद्रिक प्रवाह है कि मार्च 2022 में समाप्त वर्ष में ईसीबी मंजूरियां वित्त वर्ष 2021 के 34.8 अरब डॉलर से बढ़कर 38.2 अरब डॉलर पर पहुंच गईं।

ईसीबी मौद्रिक प्रवाह विकल्प के इस्तेमाल में इस वृद्घि को कम वैश्विक ब्याज दरों की वजह से उनके सापेक्ष लागत लाभ से मदद मिली थी। इससे देश की ऋण मांग को भी मदद मिली।

हालांकि वैश्विक ब्याज दरें बढ़ रही हैं, जिससे ईसीबी प्रवाह का आकर्षण प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा भारतीय मुद्रा में ताजा गिरावट से भी इस साल ईसीबी प्रवाह पर दबाव पड़ेगा।

आगामी वित्तीय वर्ष में मुद्रास्फीति में कमी: RBI

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति रिपोर्ट (MPR) में कहा है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index- CPI) आधारित मुद्रास्फीति , जो पिछले कुछ महीनों में बढ़ गई थी, के वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान कम रहने की उम्मीद है।

मौद्रिक प्रवाह

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राष्ट्रीय आय के चक्रीय प्रवाह .

Solution : राष्ट्रीय आय के चक्रीय रूप धारण करने को चक्रीय प्रवाह कहा जाता है। आय का चक्रीय प्रवाह दो प्रकार का होता है- (i) वास्तविक प्रवाह तथा (ii) मौद्रिक प्रवाह।

RBI MPC Meet : होम लोन, कार मौद्रिक प्रवाह लोन हो या पर्सनल लोन, सब पर ब्याज दरें बढ़ना लगभग तय, जानिए कितना हो सकता है इजाफा

RBI MPC Meet : कोलियर्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (भारत) रमेश नायर ने कहा कि रेपो दर में और वृद्धि की संभावना है। सरकार मुद्रास्फीति के स्तर पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रही है। आरबीआई ने रेपो रेट में मई से लेकर अब तक 1.40 फीसदी की वृद्धि की है।

loan interest rates

आपके लोन की ईएमआई बढ़ना लगभग तय

हाइलाइट्स

  • रेपो रेट को आधा फीसद तक बढ़ा सकता है आरबीआई
  • आरबीआई एमपीसी की 3 दिन की बैठक हुई शुरू
  • 30 सितंबर को होगी प्रमुख ब्याज दर मौद्रिक प्रवाह की घोषणा

महंगाई से निपटना हो प्राथमिकता
आरबीआई ने रेपो रेट में मई से लेकर अब तक 1.40 फीसदी की वृद्धि की है। उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा कि अमेरिका समेत कई अन्य केंद्रीय बैंकों की ब्याज मौद्रिक प्रवाह दरों में आक्रामक रूप से वृद्धि के बीच आरबीआई नीतिगत ब्याज दरों में कम से कम 0.35 से 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। एसोचैम महासचिव दीपक कपूर ने कहा, ‘‘उद्योग कम ब्याज दरों को देखना चाहता है, लेकिन टिकाऊ आर्थिक वृद्धि के लिए मुख्य चुनौती और प्राथमिकता महंगाई से निपटने की है।’’
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उच्च स्तर पर पहुंच जाएंगी होम लोन की दरें
कोलियर्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (भारत) रमेश नायर ने कहा कि रेपो दर में और वृद्धि की संभावना है। सरकार मुद्रास्फीति के स्तर पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रही है। एबीए कॉर्प के निदेशक अमित मोदी ने कहा, “रेपो दर में बढ़ोतरी करने से होम लोन की दरें अपने उच्चस्तर पर पहुंच सकती हैं। इसका असर लग्जरी श्रेणी के घर खरीदारों की भावनाओं पर पड़ सकता है। मगर विशेष कर किफायती और मध्यम आवास श्रेणी में कुछ आधार अंकों की बढ़ोतरी का ज्यादा असर नहीं होगा और नई बुकिंग एवं बिक्री जारी रहेगी।" मिगसन ग्रुप के प्रबंध निदेशक यश मिगलानी ने कहा, “आरबीआई मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए कुछ आधार अंकों की वृद्धि कर सकता है। इस समय आरबीआई अप्रत्यक्ष रूप से सभी क्षेत्रों को फायदा पहुंचाने के लिए रेपो दर में कुछ बदलाव करेगा. ।’’

भारतीय बाजारों का प्रदर्शन बेहतर
वहीं, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बाजारों ने हालांकि काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से रुपया मौद्रिक प्रवाह बाजार में. जिसमें आरबीआई के हस्तक्षेप का समर्थन करना अच्छा रहा है। विदेशी निवेशकों द्वारा अगस्त में भारतीय शेयर बाजारों में 51,200 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया था। लेकिन सितंबर में अबतक 1,386 करोड़ रुपये से अधिक के कुल निवेश के साथ एफपीआई प्रवाह में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है।

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