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निर्देशित निवेश

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पिछले दो हफ्तों के दौरान मल्टी ब्रांड रिटेल और अन्य क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मंजूरी से बाजार में जहां भरोसा बढ़ा हे वहीं सरकार अब जीवन बीमा क्षेत्र को प्रोत्साहित करने पर ध्यान दे रही है। पिछले दो हफ्तों से वित्त मंत्रालय के अधिकारी बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) के साथ व्यापक विचार-विमर्श कर रहे हैं। संभावना है कि 26 सितंबर को वित्त मंत्री पी चिदंबरम बीमा नियामक से मुलाकात कर इस बारे में कुछ निर्णय लेंगे।
जिन प्रस्तावों पर विचार हो रहा है, उनमें प्रक्रियागत मुद्दे समेत बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का मसला भी शामिल है। हालांकि बुनियादी ढांचा क्षेत्र के निर्देशित निवेश फंड के लिए बीमा कंपनियों के निवेश नियमों में ढील देने का मसला प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है। इसके अलावा, जीवन बीमा पॉलिसियों पर कराधान, यूलिप योजनाओं में सुधार, नए उत्पादों को त्वरित मंजूरी, पेंशन उत्पादों पर कर और लाइसेंसिंग नियमों में छूट जैसे मसलों पर वित्त मंत्रालय विचार कर रहा है।
मौजूदा समय में बचत को बढ़ावा देने के लिए बैंक के बाद जीवन बीमा क्षेत्र दूसरा उपागम है। जीवन बीमा उद्योग के पास निवेश के लिए करीब 13 लाख करोड़ रुपये का कोष है लेकिन इनमें से बुनियादी ढांचा क्षेत्र में केवल 16 से 17 फीसदी का निवेश होता है।
सरकार कुछ बीमा फंडों को बुनियादी ढांचा के विकास में निवेश को निर्देशित कर सकती है, क्योंकि इस क्षेत्र को अगले 5 साल में करीब 1 लाख करोड़ डॉलर की जरूरत होगी। नियामक के दिशानिर्देश के अनुसार बीमा कंपनियां सरकारी प्रतिभूतियों में 50 फीसदी तक निवेश कर सकती हैं, वहीं बुनियादी ढांचा बॉन्डों में 15 फीसदी और कॉरपोरेट बॉन्डों में 35 फीसदी तक का निवेश निर्देशित निवेश किया जा सकता है। हालांकि बीमा कंपनियों को केवल एएए या एए बॉन्डों में ही निवेश की अनुमति है। बीमा कंपनियां चाहती हैं कि नियामक यूलिप के कमीशन में इजाफा करे, क्योंकि 2008-09 के दौरान कंपनियों की कुल बिक्री में इसकी हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी थी। लेकिन नियामक की सख्ती के बाद 2011-12 के दौरान इस कारोबार का प्रीमियम घटकर 15 फीसदी रह गया है। शेयर बाजार को प्रोत्साहित करने की योजना के तहत वित्त मंत्री यूलिप में भी सुधार कर सकते हैं, क्योंकि सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश की भी तैयारी हो रही है।

नीति आयोग का अटल इनोवेशन मिशन और यूनिसेफ इंडिया सतत विकास लक्ष्‍यों और बाल अधिकारों के लिए साथ मिलकर निर्देशित निवेश काम कर रहे हैं

A mother rests her basy on her chest inside Kangaroo Mother Care (KMC) Ward at the Government hospital in Nalgonda District. Telangana State, India.

UNICEF/UN0135376/Selaam A mother rests her basy on her chest inside Kangaroo Mother Care (KMC) Ward at the Government hospital in Nalgonda District. Telangana State, India.

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नई दिल्‍ली, 24 अप्रैल 2019: नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (AIM) और यूनिसेफ इंडिया ने बाल अधिकारों पर केन्‍द्रि‍त सतत विकास लक्ष्‍य हासिल करने के लिए अटल टिंकरिंग लैब द्वारा भारत में विभिन्‍न समुदायों के युवा बच्‍चों को खुला मंच प्रदान करने के लक्ष्‍य से एक आशय-पत्र (LoI) पर हस्‍ताक्षर किए हैं।

इस आशय-पत्र पर भारत में यूनिसेफ के प्रतिनिधि डॉ. यास्मीन अली हक और अटल इनोवेशन मिशन के मिशन डायरेक्‍टर श्री रामनाथन रामानन ने हस्ताक्षर किए।

इस सहयोग के माध्यम से, एआईएम और यूनिसेफ, अटल इनोवेशन मिशन के कार्यक्रमों के माध्यम से स्‍कूलों में और स्‍कूलों के बाहर किशोरियों और किशोरों की भागीदारी, कौशल और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना चाहते हैं। यह रणनीतिक साझेदारी किशोरों, युवा उद्यमियों, मार्गदर्शकों और शिक्षकों की क्षमता को प्रभावी ढंग से बनाने में भी मदद करेगी।

इस आशय-पत्र पर हस्ताक्षर करने निर्देशित निवेश से पहले आईटीएल पब्लिक स्कूल में बच्चों को संबोधित करते हुए डॉ. यास्मीन ने प्रसन्नता ज़ाहिर की, कि यहां मौजूद हरेक बच्चे का भविष्य के लिए एक सपना होगा। उन्‍होंने कहा कि इन सपनों को साकार करने के लिए, ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है जो बच्चों में विश्लेषणात्मक कौशल, टीमवर्क और डिजिटल साक्षरता जैसे महत्वपूर्ण कौशल विकसित करें। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि यूनिसेफ की एआईएम के साथ यह साझेदारी बच्चों की उनके अधिकारों के बारे में विश्लेषणात्मक रूप से सोचने और युवा लोगों की समस्याओं के अभिनव समाधान खोजने में मदद करना चाहती है।

आशय-पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए श्री आर. रामानन ने कहा, “एआईएम और यूनिसेफ भारत में टिंकरिंग एंड इनोवेशन को बढ़ावा देने, जमीनी स्तर के अभिनव विचारों की पहचान करने और उनमें निवेश करने, कौशल विकास प्रशिक्षण आयोजित करने, युवा नवोदित इनोवेटर्स के लिए प्रदर्शन के अवसर पैदा करने और अभिनव समस्या-समाधान मानसिकता का निर्माण करने के लिए सक्रिय रूप से भागीदारी करेंगे।”

इस साझेदारी का ध्येय सामाजिक समस्याओं के लिए युवाओं द्वारा और युवाओं के लिए साथ मिलकर अभिनव प्रौद्योगिकी समाधान सृजन करना, सार्वजनिक अथवा निजी सहायता के माध्यम से उन्हें हासिल करना, और सूचना, अभिव्यक्ति और निर्णय लेने के लिए बच्चों/किशोरों के अधिकारों को बढ़ावा देना होगा। इस साझेदारी के प्रमुख प्रोग्रामिंग तत्वों में शामिल हैं: i) कौशल विकास, जिसमें स्‍कूल न जाने वाले बच्‍चों और विश्‍वद्यालयों के बच्‍चों पर ध्‍यान केन्द्रित करते हुए स्‍कूल स्‍तर से ही बच्‍चों में 21वीं सदी के कौशल और मनोवैज्ञानिक कौशल उत्‍पन्‍न करना (ii) 'आशाजनक विचारों' में निवेश कर समाधान तैयार करना जो युवा लोगों द्वारा युवा लोगों के लिए चुनौतियों का समाधान निकालें और हासिल करें और (iii) स्कूल जाने वाले और न जाने वाले बच्चों के लिए बूट कैंप और इनक्यूबेशन सेंटर्स के युवाओं के लिए उद्यमिता बूट कैंप और (iv) बच्चों और किशोरों के सह-सृजित किए जा सकने और बढ़ाए जा सकने वाले प्रौद्योगिकी-आधारित अभिनव समाधानों के आधार पर बच्चों और किशोरों के लिए आदर्शों की पहचान करना।

यूनिसेफ विभिन्न युवा-आधारित कार्यक्रम आयोजित करने में स्कूलों की मदद कर जमीनी स्तर पर निर्देशित निवेश अटल टिंकरिंग लैब्स और एआईएम को सहायता देगा। यूनिसेफ ने #ATLCommunityDay के संचालन के लिए अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL) पहल के तहत 100 स्कूल चुने हैं, जहां समुदाय के बच्चों को मस्ती भरे क्रिया-कलापों सहित सतत विकास लक्ष्यों और चिंतनशील समाधानों की चुनौतियों को समझने का मौका मिलेगा। यह सहयोग भारत में युवा मस्तिष्‍कों के बीच रचनात्मकता की भावना को बढ़ाने में मदद करने के लिए है।

एआईएम के बारे में:

देश में नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एआईएम भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है। एआईएम के भाग के रूप में, भारत में 5,000 से अधिक स्कूलों में एएलटी की स्थापना की जा रही है जहां कक्षा छठी से लेकर बारहवीं तक के छात्र समस्या समाधान एवं नवाचार कौशल अर्जित करते हैं; 3डी प्रिंटर, रोबोटिक्स, मिनीएच्‍राइज्‍ड इलेक्ट्रॉनिक्स, आईओटी और प्रोग्रामिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का लाभ उठाने वाले नवीन समाधान विकसित करते हैं, वे इसे अपने शिक्षकों की सहायता से डू-इट-योरसेल्फ किट से करते हैं।

अटल टिंकरिंग लैब देशभर के युवा छात्रों में नवाचार की पहचान करने और बढ़ावा देने के विचार पर आधारित है। इस प्रयास के लिए, एआईएम ने उद्योग और शैक्षणिक समुदाय के विभिन्न सहयोगियों के साथ मिलकर काम किया है। ऐसे सहयोग से भविष्य के कौशल और एटीएल पारितंत्र की डिजिटल क्षमताओं में गुणात्मक वृद्धि हुई है।

यूनिसेफ युवाह (YuWaah) के बारे में:

यूनिसेफ संयुक्त राष्ट्र का अभिन्न अंग है, जो बच्चों के अधिकारों को आगे बढ़ाने के लिए सरकारों, समुदायों, सिविल सोसाइटी संगठनों, निजी क्षेत्र और दुनियाभर के अन्य भागीदारों के साथ काम करता है और यह बाल अधिकारों कन्वेंशन द्वारा निर्देशित है। यदि भारत में प्रत्येक युवा 2030 तक स्कूल जाने लगता है, सीखने लगता है अथवा प्रशिक्षण प्राप्‍त करने लगता है, रोजगार के लिए पढ़ना-लिखना और अंक ज्ञान सीख लेता है तो इससे भारत का सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य बदल जाएगा। भारत के 10-19 वर्ष की आयु की 25.3 करोड़ आबादी है, जो विश्व की 21 प्रतिशत किशोर आबादी दर्शाती हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा संभावित कार्यबल है।

यूनिसेफ ने हाल ही में ग्‍लोबल जनरेशन निर्देशित निवेश अनलिमिटेड साझेदारी शुरू की है, जिसका उद्देश्‍य यह सुनिश्चित करना है कि वर्ष 2030 तक प्रत्येक युवा अपनी निर्देशित निवेश आयु के अनुकूल किसी न किसी रूप में स्कूल जाए, सीखने जाए, प्रशिक्षण अथवा रोजगार/नौकरी में जाए, ताकि वे अपने लक्ष्य हासिल कर उत्पादक नागरिक बन सकें। इसका उद्देश्य बालिकाओं पर ध्यान देने के साथ माध्यमिक आयु-शिक्षा, सीखने के लिए कौशल, रोजगार और सभ्य कार्य और सशक्तिकरण से संबंधित प्रमाणित समाधानों का सह-सृजन और उन्‍हें बढ़ाना है। भारत में, 10-19 वर्ष की आयु के देश के 25.3 करोड़ किशोरों की शक्ति और क्षमता पहचानने निर्देशित निवेश वाली इस पहल को युवाह (YuWaah) कहा जाता है।

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सरकार ने नए विदेशी निवेश नियमों को अधिसूचित किया

नई दिल्ली: सरकार द्वारा सोमवार को अधिसूचित नए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (ODI) नियमों के अनुसार, एक भारतीय इकाई केवल आंतरिक स्रोतों से विदेशी स्टार्ट-अप में प्रत्यक्ष निवेश कर सकती है, चाहे वह किसी घरेलू इकाई या समूह या देश की सहयोगी कंपनी निर्देशित निवेश से हो। .

इसमें कहा गया है कि एक निवासी व्यक्ति मेजबान देश के कानूनों के तहत मान्यता प्राप्त विदेशी स्टार्ट-अप में सीधे निवेश कर सकता है, केवल अपने फंड से। नए नियम एक निवासी व्यक्ति को एक विदेशी संस्था में वित्तीय प्रतिबद्धता बनाने से रोकते हैं जिसने भारत में निवेश या निवेश किया है, जिसके परिणामस्वरूप सब्सिडी की दो परतों के साथ एक संरचना होती है।

केवल बैंकिंग और बीमा फर्मों, एनबीएफसी और सरकारी फर्मों को ही ऐसी विदेशी संस्थाओं में निवेश करने की अनुमति है। विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 के अनुपालन के निर्देशित निवेश अधीन, केवल रिश्तेदारों से विदेशी प्रतिभूतियों का उपहार प्राप्त करने पर प्रतिबंध को भारत के बाहर किसी भी अनिवासी से अनुमेय के रूप में प्रतिस्थापित किया गया है।

नांगिया एंडरसन एलएलपी के एम एंड ए टैक्स पार्टनर संदीप झुनझुनवाला कहते हैं, "नियमों का अंतिम सेट कई बदलावों का परिचय देता है जो कॉरपोरेट्स और स्टार्ट-अप्स सहित भारतीय निवासियों के एम एंड ए फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।" नए नियम - विदेशी मुद्रा प्रबंधन (विदेशी निवेश) नियम, 2022 - भी पहली बार गांधी नगर में गिफ्ट सिटी जैसे अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) में निवेश के लिए मानदंडों का एक सेट है। IFSCs को एक विदेशी क्षेत्राधिकार के रूप में माना जाता है।

मुंबई स्थित चार्टर्ड एकाउंटेंट धवल जरीवाल ने टीएनआईई को बताया कि आईएफएससी में पहले के निवेश विदेशी वित्तीय सेवाओं में सामान्य निवेश कानूनों द्वारा निर्देशित थे, लेकिन नए ओडीआई नियमों में आईएफएससी के लिए एक अलग कार्यक्रम है। सरकार के अनुसार, विदेशी निवेश के लिए संशोधित नियामक ढांचा मौजूदा ढांचे के सरलीकरण का प्रावधान करता है।

यस बैंक में निवेश कमाई के लिये नहीं बल्कि वित्तीय प्रणाली में स्थिरता के लिये: एसबीआई चेयरमैन

मुंबई, 16 मार्च (भाषा) एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने सोमवार को कहा कि संकट में फंसे यस बैंक में विभिन्न बैंकों के निवेश का मकसद वित्तीय स्थिरता बनाये रखना है और यह निवेश के प्रतिफल (आरओआई) के सिद्धांत से निर्देशित नहीं है। रिजर्व बैंक की पुनर्गठन योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) समेत सात अन्य वित्तीय संस्थानों ने संकट ग्रस्त यस बैंक में पिछले सप्ताह करीब 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया। एसबीआई कार्ड एंड पेमेंट सर्विसेज के सूचीबद्धता समारोह के मौके पर कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘एसबीआई तथा अन्य बैंकों के निर्णय एक साथ आ रहे हैं,

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